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कोशिश थी मेरी के ना समझू प्यार की बातें कभी
दिल ये तेरे हाल का तू खुद ही गुनहगार है
-सलिक
(Urdu and Hindi Shayari, Sher, Gazal Archive-1

नितीन कळंबे

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तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .

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