खयालों का का रवां -सलिक
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खयालों का कारवां
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नितीन कळंबे
12:29 AM
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शब ने संभाली हुई हर गुफ्तगू की आस थी
दिन उजालो मी निशा यादों के फिर भी मिट गये
-सलिक
(Urdu and Hindi Shayari, Sher, Gazal Archive-1)
नितीन कळंबे
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तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .
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