पर्दानशीं है लुभाता रहेगा
मेरे सब्र को आजमाता रहेगा
यहाँ हर जगह हैं दिमागी सियासत
क्या दिल दूसरे को सताता रहेगा
ज़ेहानत से तेरी मैं हैराँ हुआ हु
कोई ख़्वाब कब तक सजाता रहेगा
भटक जायेगा वो यक़ीनन मुसाफिर
जो राहों से नाता बनाता रहेगा
सुनो बादलों में फसां है परिंदा
तुम्हे याद मेरी दिलाता रहेगा
टुटा हुआ दिल तेरी बेवफाई
तेरी बज्म में ही सुनाता रहेगा

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