तेरी कोशिश कामयाब कर गयी
तेरी हर ख़्वाइश नवाब कर गयी
वैसे नरम तबियत थे हम लेकिन
तेरी बेचैनी इज़्तिराब कर गयी
अजल से था ' सलिक ' तकलीफ में दिल
वो उस सवाल को जवाब कर गयी
ख्वाब गिनके रखे थे कुछ बोरी में
तेरी निगाह बेहिसाब कर गयी
उलझा दिल सोचता रहा के कौन
जो ये रात आफ़ताब कर गयी
मालूम होते थे नरम मिज़ाज हम
किसकी आहट बे-नक़ाब कर गयी

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