by 8:39 PM 0 comments
कुछ कशिश सी दरमियान हो जाए
तेरी मेरी दास्तान हो जाए

बहुत होंगे तेरे आशिक लेकिन 
हमारा भी इम्तिहान हो जाए

इस तरह मिल के नींद ना टूटे
और हक़ीकत अरमान हो जाए

तेरे नूरसे आफ़ताब छिप जाए
तू चाँद हम आसमान हो जाए

दिल रक्खा हैं निशाने पे हमने 
जो तू तीर-ओ-कमान हो जाए

नितीन कळंबे

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तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .

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