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पुंछ मत के क्यू ना भाती मुझ को अब मासुमियत
मासूम हस उसने धकेले ख्वाब कत्ले-गाह में
-सलिक

(Urdu and Hindi Shayari, Sher, Gazal Archive-1)

नितीन कळंबे

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तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .

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