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चराग जला दो आलम में या दिल ये अब जलने लगेगा
नूर-ए-इश्क की याद जगाते सुरज जब ढलने लगेगा
-सलिक
(Urdu and Hindi Shayari, Sher, Gazal Archive-1


नितीन कळंबे

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तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .

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