by 12:33 AM 0 comments
सारा जमाना ख्वाब की ना हसरते पुरी हुई
इल्तिजा थी दिल की फिर ना कोई चोरी हुई
-सलिक

(Urdu and Hindi Shayari, Sher, Gazal Archive-1)

नितीन कळंबे

Developer

तू नज्म है या शायरी या फिर गीत ही कोई मेरे किताब का पन्ना या उडती पतंग है कोई -सलिक .

0 comments:

Post a Comment